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अशोक वाटिका में सीता दर्शन – हनुमान की वीरता

बहुत समय पहले की बात है, जब भगवान राम वनवास में थे। एक दिन राक्षसराज रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और उन्हें लंका ले गया। श्री राम बहुत दुखी हुए और सीता माता की खोज में निकले।

जब राम जी को पता चला कि सीता माता लंका में हैं, तो उन्होंने अपने प्रिय भक्त हनुमान जी को बुलाया। “हे पवनपुत्र हनुमान!” राम जी ने कहा, “तुम्हें लंका जाकर सीता माता का पता लगाना होगा।”

हनुमान जी ने हाथ जोड़कर कहा, “प्रभु, आपकी आज्ञा मेरे सिर पर। मैं अवश्य माता सीता को खोज लूंगा।”

हनुमान जी ने अपना विशाल रूप धारण किया और समुद्र को पार करके लंका पहुंचे। लंका में पहुंचकर वे छोटे रूप में बदल गए और सीता माता की खोज करने लगे।

रात के समय हनुमान जी ने पूरी लंका में खोजा। वे महलों में गए, बगीचों में गए, लेकिन सीता माता कहीं नहीं मिलीं। अंत में वे अशोक वाटिका पहुंचे।

अशोक वाटिका में सीता दर्शन का वह पल बहुत ही पवित्र था। हनुमान जी ने देखा कि एक अशोक वृक्ष के नीचे एक दिव्य स्त्री बैठी हुई है। वे पीले वस्त्र पहने हुए थीं और बहुत दुखी लग रही थीं।

हनुमान जी समझ गए कि ये माता सीता हैं। उनके चारों ओर राक्षसियां पहरा दे रही थीं। सीता माता राम नाम का जाप कर रही थीं और आंसू बहा रही थीं।

हनुमान जी ने सोचा कि वे कैसे सीता माता से मिलें। वे पेड़ पर चढ़ गए और धीरे से राम नाम का जाप करने लगे। जब सीता माता ने राम नाम सुना, तो वे चौंक गईं।

“कौन है वहां?” सीता माता ने पूछा। हनुमान जी ने अपना परिचय दिया, “माता, मैं हनुमान हूं, राम जी का दास। प्रभु राम ने मुझे आपको खोजने भेजा है।”

सीता माता की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। हनुमान जी ने राम जी की अंगूठी दिखाई। सीता माता ने अंगूठी देखकर पहचान लिया कि ये सच में राम जी के भेजे हुए हैं।

“हे हनुमान!” सीता माता ने कहा, “मेरे प्रभु कैसे हैं? क्या वे मुझे याद करते हैं?”

हनुमान जी ने कहा, “माता, प्रभु राम दिन-रात आपको याद करते हैं। वे बहुत जल्दी यहां आकर आपको मुक्त कराएंगे।”

सीता माता ने अपनी चूड़ामणि निकालकर हनुमान जी को दी और कहा, “इसे राम जी को दे देना। वे समझ जाएंगे कि तुमने मुझसे मुलाकात की है।”

हनुमान जी ने चूड़ामणि ली और कहा, “माता, मैं रावण को सबक सिखाना चाहता हूं। क्या आप अनुमति देती हैं?”

सीता माता ने कहा, “पुत्र, तुम जो उचित समझो, वो करो। लेकिन सावधान रहना।”

हनुमान जी ने अशोक वाटिका में तोड़फोड़ शुरू कर दी। उन्होंने पेड़ों को उखाड़ा, फूलों को तोड़ा, और राक्षसों से युद्ध किया। जब रावण को पता चला, तो वह बहुत क्रोधित हुआ।

रावण ने हनुमान जी को पकड़वाया और उनकी पूंछ में आग लगवा दी। लेकिन हनुमान जी ने पूरी लंका में आग लगा दी। फिर वे समुद्र में कूदकर आग बुझाई और वापस राम जी के पास लौट गए।

राम जी के पास पहुंचकर हनुमान जी ने सारी कहानी सुनाई। उन्होंने सीता माता की चूड़ामणि दी। राम जी बहुत खुश हुए और हनुमान जी को गले लगाया।

“धन्य हो हनुमान!” राम जी ने कहा, “तुमने बहुत बड़ा काम किया है। अब हम सीता को मुक्त कराने के लिए लंका पर आक्रमण करेंगे।”

इस प्रकार अशोक वाटिका में सीता दर्शन की यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति और साहस से हर मुश्किल का समाधान हो सकता है। हनुमान जी की वीरता और बुद्धिमानी से ही राम जी को सीता माता का पता चल सका।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा अच्छाई का साथ देना चाहिए और बुराई का विरोध करना चाहिए। हनुमान जी की तरह हमें भी निडर होकर सत्य के लिए खड़ा होना चाहिए।

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