Summarize this Article with:

हनुमान जी का सुरसा से मुकाबला – वीरता की कहानी

बहुत समय पहले की बात है, जब भगवान राम के प्रिय भक्त हनुमान जी माता सीता की खोज में समुद्र पार करके लंका जा रहे थे। उनकी यात्रा में अनेक बाधाएं आईं, लेकिन सबसे रोमांचक था सुरसा से मुकाबला

हनुमान जी जब समुद्र के ऊपर से उड़ रहे थे, तो अचानक समुद्र से एक विशाल राक्षसी प्रकट हुई। उसका नाम था सुरसा। वह नागों की माता थी और उसका मुंह इतना बड़ा था कि पूरा पहाड़ भी उसमें समा जाए।

“रुको वीर योद्धा!” सुरसा ने गर्जना करते हुए कहा। “मैं सुरसा हूं और देवताओं ने मुझे वरदान दिया है कि कोई भी इस रास्ते से बिना मेरे मुंह में जाए नहीं गुजर सकता।”

हनुमान जी ने विनम्रता से कहा, “माता सुरसा, मैं श्री राम का दास हूं और माता सीता की खोज में जा रहा हूं। कृपया मुझे जाने दें।”

लेकिन सुरसा ने अपना मुंह और भी बड़ा कर लिया। “नहीं वीर, नियम तो नियम है। तुम्हें मेरे मुंह से होकर जाना होगा।”

यह देखकर हनुमान जी समझ गए कि यह एक परीक्षा है। उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग करने का निश्चय किया। सुरसा से मुकाबला करने के लिए उन्होंने एक चतुर योजना बनाई।

हनुमान जी ने अपना आकार बढ़ाना शुरू किया। जैसे-जैसे वे बड़े होते गए, सुरसा भी अपना मुंह बड़ा करती गई। हनुमान जी दस योजन के हो गए, तो सुरसा का मुंह बीस योजन का हो गया। हनुमान जी सौ योजन के हो गए, तो सुरसा का मुंह दो सौ योजन का हो गया।

यह खेल चलता रहा। अंत में हनुमान जी ने अचानक अपना आकार बहुत छोटा कर लिया – एक मक्खी के बराबर। इतनी तेजी से वे सुरसा के मुंह में गए और तुरंत बाहर निकल आए।

“माता सुरसा, मैं आपके मुंह से होकर गुजर गया हूं। अब आपका नियम भी पूरा हो गया और मेरा काम भी नहीं रुका।” हनुमान जी ने मुस्कराते हुए कहा।

सुरसा बहुत प्रसन्न हुई। उसने अपना असली रूप दिखाया – वह एक सुंदर देवी थी। “वत्स हनुमान, तुमने मेरी परीक्षा में सफलता पाई है। तुम्हारी बुद्धि और भक्ति देखकर मैं बहुत खुश हूं।”

सुरसा से मुकाबला करके हनुमान जी ने सिद्ध कर दिया था कि कठिन से कठिन समस्या का समाधान बुद्धि और धैर्य से किया जा सकता है। सुरसा ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनकी यात्रा सफल हो।

“जाओ वीर, तुम्हारा मिशन सफल हो। तुम्हारी बुद्धिमत्ता और राम भक्ति तुम्हें हर मुश्किल से पार लगाएगी।” सुरसा ने कहा।

हनुमान जी ने सुरसा को प्रणाम किया और आगे की यात्रा के लिए निकल पड़े। उनका यह सुरसा से मुकाबला दिखाता है कि जब हम सच्चे मन से किसी अच्छे काम में लगे होते हैं, तो भगवान हमारी बुद्धि को जगाकर हर समस्या का हल दे देते हैं।

इस प्रकार हनुमान जी ने अपनी चतुराई से सुरसा की परीक्षा पास की और माता सीता की खोज में आगे बढ़े। यह कहानी हमें सिखाती है कि कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि धैर्य और बुद्धि से काम लेना चाहिए।

Summarize this Article with:

About Me

Welcome to StoriesPub.com We started in 2019 with a simple idea to provide our readers with useful and interesting information. Our team is dedicated to curating a wide range of captivating content in different categories, including inspirational stories, funny tales, Parenting, Kids’ products, Educational AI content, Tech content, coloring books, how to draw, and more.