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तीन सेब की कहानी – रहस्यमय हत्या और न्याय
बहुत समय पहले, बगदाद शहर में खलीफा हारून अल-रशीद का राज था। एक दिन दजला नदी के किनारे मछुआरों को एक बड़ा संदूक मिला। जब उन्होंने उसे खोला तो अंदर एक सुंदर युवती का शव था, जो छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा गया था।
यह समाचार जब खलीफा तक पहुंचा, तो वे बहुत क्रोधित हुए। उन्होंने अपने वजीर जाफर को आदेश दिया, “तुम्हें तीन दिन में इस रहस्यमय हत्या का सच पता लगाना होगा, नहीं तो तुम्हारी भी यही गति होगी।”
जाफर ने पूरे शहर में खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। तीसरे दिन जब वह निराश होकर घर लौट रहा था, तो रास्ते में उसने देखा कि एक छोटा बच्चा अपने हाथ में तीन सेब लेकर खेल रहा था।
जाफर ने पूछा, “बेटे, ये सेब कहाँ से लाए हो?”
बच्चे ने मासूमियत से कहा, “ये मेरी अम्मी के थे। मेरे अब्बू ने बसरा से लाकर दिए थे। लेकिन अब अम्मी नहीं रहीं।”
जाफर का दिल धक से रह गया। उसने बच्चे से पूछा कि उसकी माँ कहाँ गई है। बच्चे ने बताया कि उसके पिता ने कहा था कि माँ कहीं दूर चली गई है।
जाफर बच्चे को लेकर उसके घर गया। वहाँ एक युवक मिला जो बहुत परेशान लग रहा था। जब जाफर ने तीन सेब की कहानी के बारे में पूछा, तो वह युवक रोने लगा।
युवक ने कहा, “मैं ही हूँ वह अभागा जिसने अपनी पत्नी की हत्या की है। मेरी पत्नी बीमार थी और उसका मन सेब खाने को करता था। मैं बसरा गया और बड़ी मुश्किल से तीन सेब लाया।”
“जब मैं घर लौटा तो देखा कि एक सेब गायब था। मैंने पत्नी से पूछा तो उसने कहा कि उसने किसी को नहीं दिया। मुझे लगा कि वह झूठ बोल रही है। गुस्से में मैंने उसकी हत्या कर दी।”
युवक ने आगे बताया, “बाद में पता चला कि हमारा नौकर चुपके से एक सेब ले गया था और बाजार में बेच दिया था। वही सेब इस बच्चे ने खरीदा था। मैंने अपनी निर्दोष पत्नी को बेकार में मार डाला।”
जाफर इस सच्चाई की खोज से हैरान रह गया। वह युवक को लेकर खलीफा के पास गया और पूरी कहानी सुनाई।
खलीफा हारून अल-रशीद ने कहा, “यह कहानी हमें सिखाती है कि जल्दबाजी में किया गया फैसला कितना खतरनाक हो सकता है। तुमने अपनी पत्नी पर भरोसा नहीं किया और गुस्से में उसकी जान ले ली।”
युवक ने रोते हुए कहा, “हुजूर, मुझे अपनी गलती का एहसास है। मैं अपनी सजा के लिए तैयार हूँ।”
खलीफा ने न्याय करते हुए कहा, “तुम्हारी सजा यह है कि तुम अपने बच्चे का अच्छे से पालन-पोषण करोगे और हमेशा सच्चाई और धैर्य का साथ दोगे। तुम्हारा पछतावा ही तुम्हारी सबसे बड़ी सजा है।”
इस प्रकार तीन सेब की कहानी समाप्त हुई। इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए। संदेह और गुस्से में लिए गए फैसले हमेशा गलत होते हैं।
सीख: धैर्य रखें, सच्चाई की खोज करें, और अपने प्रियजनों पर भरोसा करें। क्रोध में लिया गया निर्णय हमेशा पछतावे का कारण बनता है।
इस कहानी की तरह, समझदारी और धैर्य का महत्व समझना आवश्यक है।
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