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हातिम ताई और कोहनिदा पहाड़ की खोज

बहुत समय पहले की बात है, जब अरब की धरती पर वीर योद्धा हातिम ताई का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाता था। उनकी दानवीरता और न्याय की कहानियां दूर-दूर तक फैली हुई थीं। एक दिन हातिम ताई के पास एक बूढ़ा व्यापारी आया।

“हे महान हातिम ताई!” बूढ़े व्यापारी ने कहा, “मेरी बेटी बहुत बीमार है। केवल कोहनिदा पहाड़ की चोटी पर उगने वाली संजीवनी बूटी ही उसे बचा सकती है।”

हातिम ताई का हृदय करुणा से भर गया। वे तुरंत तैयार हो गए। कोहनिदा पहाड़ की खोज एक कठिन यात्रा थी, लेकिन हातिम ताई ने कभी किसी की सहायता से मुंह नहीं मोड़ा था।

अपने विश्वसनीय घोड़े पर सवार होकर हातिम ताई ने यात्रा शुरू की। रास्ते में उन्हें एक छोटा बच्चा मिला जो रो रहा था।

“क्या बात है बेटे?” हातिम ताई ने प्रेम से पूछा।

“मेरी मां को एक राक्षस ने बंदी बना लिया है। वह कोहनिदा पहाड़ की गुफा में रहता है,” बच्चे ने सिसकते हुए कहा।

हातिम ताई ने बच्चे को अपने साथ ले लिया। कोहनिदा पहाड़ की खोज अब दो जीवन बचाने का मिशन बन गई थी।

कई दिनों की कठिन यात्रा के बाद, वे कोहनिदा पहाड़ के पास पहुंचे। पहाड़ बहुत ऊंचा और डरावना था। चारों ओर घने बादल छाए हुए थे।

पहाड़ की तलहटी में एक बुद्धिमान संत मिले। “हे वीर योद्धा!” संत ने कहा, “यह पहाड़ तीन परीक्षाओं से भरा है। पहली परीक्षा साहस की, दूसरी बुद्धि की, और तीसरी दया की है।”

हातिम ताई ने सिर झुकाकर संत का आशीर्वाद लिया और चढ़ाई शुरू की। पहली परीक्षा में एक विशाल सांप ने रास्ता रोका। हातिम ताई ने अपनी तलवार निकाली, लेकिन सांप बोला:

“मैं तुम्हारा शत्रु नहीं हूं। मैं इस पहाड़ का रक्षक हूं। तुम्हारे साहस की परीक्षा यह है कि तुम मुझसे लड़े बिना आगे बढ़ो।”

हातिम ताई ने अपनी तलवार वापस म्यान में रख दी और निडरता से सांप के पास से गुजर गए। सांप ने रास्ता दे दिया।

दूसरी परीक्षा में उन्हें एक पहेली का सामना करना पड़ा। एक जादुई दरवाजे पर लिखा था: “वह क्या है जो देने से बढ़ता है और रखने से घटता है?”

हातिम ताई ने सोचा और मुस्कराते हुए कहा: “प्रेम और दया!” दरवाजा खुल गया।

तीसरी परीक्षा सबसे कठिन थी। पहाड़ की चोटी पर एक राक्षस ने बच्चे की मां को बंदी बना रखा था। राक्षस बहुत शक्तिशाली था।

“तुम यहां क्यों आए हो?” राक्षस ने गरजकर पूछा।

“मैं संजीवनी बूटी लेने आया हूं और इस महिला को मुक्त कराने आया हूं,” हातिम ताई ने निडरता से कहा।

राक्षस हंसा: “तुम दोनों में से केवल एक चीज ले सकते हो। या तो बूटी लो या महिला को बचाओ।”

यह दया की परीक्षा थी। हातिम ताई ने एक पल भी नहीं सोचा। “मैं इस महिला को चुनता हूं। एक मां का जीवन सबसे कीमती है।”

राक्षस का हृदय परिवर्तन हो गया। “तुम्हारी दया ने मुझे जीत लिया है। तुम दोनों चीजें ले जा सकते हो।” राक्षस ने कहा और गायब हो गया।

हातिम ताई ने संजीवनी बूटी ली और महिला को मुक्त कराया। बच्चा अपनी मां से मिलकर खुशी से रो पड़ा।

वापसी की यात्रा में, हातिम ताई ने पहले व्यापारी की बेटी को संजीवनी बूटी दी। बेटी स्वस्थ हो गई। व्यापारी ने हातिम ताई को बहुत धन देना चाहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।

“सच्ची संपत्ति दूसरों की सेवा में है,” हातिम ताई ने कहा।

कोहनिदा पहाड़ की खोज ने हातिम ताई को सिखाया कि जीवन में सबसे बड़ी जीत दूसरों के लिए अपना त्याग करना है। उनकी यह कहानी आज भी लोगों को प्रेरणा देती है।

इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि साहस, बुद्धि और दया के साथ हम किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं। सच्चा वीर वही है जो दूसरों की भलाई के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देता है।

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