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दूत का उपहार – अकबर बीरबल की कहानी

बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन बड़ी चहल-पहल थी। दूर देश से एक दूत आया था और वह अपने साथ एक विशेष उपहार लेकर आया था। यह दूत का उपहार कोई साधारण चीज़ नहीं था, बल्कि एक रहस्यमय संदूक था जिसमें कुछ अनमोल था।

दूत ने बादशाह अकबर के सामने झुकते हुए कहा, “हुज़ूर, मेरे राजा ने आपके लिए यह विशेष उपहार भेजा है। लेकिन इसकी एक शर्त है – यह संदूक केवल वही व्यक्ति खोल सकता है जो सबसे बुद्धिमान हो।”

अकबर ने उत्सुकता से संदूक को देखा। वह सुनहरे रंग का था और उस पर अजीब से निशान बने हुए थे। संदूक पर कोई ताला नहीं था, फिर भी वह खुल नहीं रहा था।

“बीरबल!” अकबर ने आवाज़ लगाई। “आओ और इस दूत के उपहार को देखो। क्या तुम इसे खोल सकते हो?”

बीरबल ने संदूक को ध्यान से देखा। उन्होंने उसे हर तरफ से परखा और फिर दूत से पूछा, “महाशय, क्या आप बता सकते हैं कि यह उपहार किस चीज़ का प्रतीक है?”

दूत मुस्कराया और बोला, “यह उपहार सच्ची बुद्धि का प्रतीक है। जो व्यक्ति इसे खोलेगा, वह साबित करेगा कि वह वास्तव में बुद्धिमान है।”

दरबार के कई विद्वानों ने कोशिश की, लेकिन कोई भी संदूक नहीं खोल सका। कुछ ने जोर लगाया, कुछ ने मंत्र पढ़े, लेकिन संदूक वैसा का वैसा ही रहा।

बीरबल चुपचाप सब कुछ देख रहे थे। अचानक उन्होंने संदूक को उठाया और उसे उल्टा कर दिया। संदूक के नीचे एक छोटा सा बटन था। बीरबल ने उस बटन को दबाया और खटाक की आवाज़ के साथ संदूक खुल गया।

सभी लोग आश्चर्य से देखने लगे। संदूक के अंदर एक सुंदर दर्पण था और उसके नीचे एक पत्र था। बीरबल ने पत्र पढ़ा:

“जो व्यक्ति इस संदूक को खोलेगा, वह समझेगा कि सच्ची बुद्धि यह है कि हम चीज़ों को अलग नज़रिए से देखें। यह दर्पण इस बात का प्रतीक है कि बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा अपने अंदर झांकता है और सच्चाई को पहचानता है।”

अकबर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने पूछा, “बीरबल, तुमने कैसे जाना कि संदूक को उल्टा करना है?”

बीरबल ने विनम्रता से उत्तर दिया, “जहांपनाह, जब दूत ने कहा कि यह दूत का उपहार बुद्धि का प्रतीक है, तो मैंने सोचा कि इसका समाधान भी अलग तरीके से सोचने में होगा। जब सभी ने ऊपर से खोलने की कोशिश की, तो मैंने नीचे देखा।”

दूत ने प्रशंसा की और कहा, “वाह! यही तो सच्ची बुद्धि है। आपने साबित कर दिया कि आप वास्तव में बुद्धिमान हैं।”

अकबर ने बीरबल को गले लगाया और कहा, “तुम्हारी बुद्धि का यह उपहार मेरे लिए किसी भी खज़ाने से कीमती है।”

इस घटना के बाद, यह दूत का उपहार दरबार में रख दिया गया ताकि सभी को याद रहे कि सच्ची बुद्धि हमेशा अलग तरीके से सोचने में होती है।

सीख: यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी समस्या का समाधान वहां होता है जहां हम नहीं देखते। सच्ची बुद्धि यह है कि हम चीज़ों को अलग नज़रिए से देखें और धैर्य के साथ सोचें। जैसे बीरबल ने दूत के उपहार को समझा, वैसे ही हमें भी जीवन की चुनौतियों का सामना करना चाहिए।

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