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हाथी और चींटी की अनोखी मित्रता
बहुत समय पहले, एक घने जंगल में गजराज नाम का एक विशाल हाथी रहता था। वह अपने आकार और शक्ति पर बहुत गर्व करता था। जंगल के सभी जानवर उससे डरते थे और उसका सम्मान करते थे।
उसी जंगल में मुन्नी नाम की एक छोटी सी चींटी रहती थी। वह बहुत मेहनती और दयालु थी। हर दिन वह अपने परिवार के लिए भोजन इकट्ठा करती और दूसरे जानवरों की मदद भी करती थी।
एक दिन गजराज जंगल में घूम रहा था। अचानक उसका पैर मुन्नी के घर के पास पड़ा। “अरे छोटी चींटी!” गजराज ने घमंड से कहा, “तुम इतनी छोटी हो कि मैं तुम्हें देख भी नहीं सकता। तुम्हारा कोई महत्व नहीं है।”
मुन्नी ने विनम्रता से उत्तर दिया, “हाथी राजा, आकार से किसी की महानता नहीं मापी जाती। हर प्राणी का अपना महत्व होता है।”
गजराज हंसकर बोला, “तुम जैसी छोटी चींटी मेरी क्या मदद कर सकती है? मैं जंगल का राजा हूं!”
कुछ दिन बाद, शिकारियों का एक दल जंगल में आया। उन्होंने गजराज को पकड़ने के लिए एक मजबूत जाल बिछाया। गजराज भोजन की तलाश में निकला और जाल में फंस गया।
वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा, “बचाओ! कोई मेरी मदद करो!” लेकिन उसकी आवाज सुनकर सभी जानवर डर गए और छुप गए।
मुन्नी ने गजराज की आवाज सुनी। वह तुरंत अपने साथियों को बुलाई और बोली, “चलो, हमें हाथी राजा की मदद करनी चाहिए।”
हजारों चींटियों का दल मुन्नी के साथ गजराज के पास पहुंचा। उन्होंने मिलकर जाल की रस्सियों को काटना शुरू किया। छोटे-छोटे दांतों से वे लगातार रस्सी काटते रहे।
कुछ घंटों बाद जाल कमजोर हो गया और गजराज आजाद हो गया। वह बहुत शर्मिंदा था। उसने मुन्नी से कहा, “मुझे माफ कर दो, छोटी बहन। मैंने तुम्हें छोटा समझकर गलती की थी।”
मुन्नी मुस्कराकर बोली, “कोई बात नहीं, हाथी भाई। हम सब मिलकर एक परिवार हैं।”
उस दिन के बाद गजराज और मुन्नी के बीच गहरी मित्रता हो गई। हाथी और चींटी एक-दूसरे की मदद करते और खुशी से रहते।
नैतिक शिक्षा: आकार या शक्ति से किसी की महानता नहीं मापी जाती। सबसे छोटा प्राणी भी बड़े से बड़े काम आ सकता है। हमें कभी किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए और सभी का सम्मान करना चाहिए।
इस कहानी से हमें यह भी सीख मिलती है कि सामाजिकता और सहयोग का महत्व हमेशा याद रखना चाहिए।













