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व्यापारी का बेटा और चतुर बंदर की कहानी

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से शहर में रामदास नाम का एक धनी व्यापारी रहता था। उसका एक बेटा था जिसका नाम अर्जुन था। अर्जुन बहुत ही घमंडी और अहंकारी था। वह हमेशा अपने पिता की दौलत का दिखावा करता रहता था।

एक दिन रामदास ने अपने बेटे से कहा, “बेटा अर्जुन, अब तुम बड़े हो गए हो। तुम्हें व्यापार सीखना चाहिए। कल तुम पास के गांव में जाकर हमारा सामान बेचकर आना।”

अर्जुन ने अपने पिता की बात मान ली। अगले दिन वह अपने साथ कई बहुमूल्य वस्तुएं लेकर गांव की ओर चल पड़ा। रास्ते में एक घने जंगल से होकर गुजरना था।

जंगल में पहुंचकर व्यापारी का बेटा एक पेड़ के नीचे आराम करने के लिए रुका। अचानक उसकी नजर पेड़ पर बैठे एक बंदर पर पड़ी। यह बंदर बहुत ही चतुर और समझदार था।

बंदर ने अर्जुन से कहा, “अरे व्यापारी के बेटे! तुम्हारे पास बहुत सुंदर चीजें हैं। क्या तुम मुझे भी कुछ दे सकते हो?”

अर्जुन ने घमंड से कहा, “तू सिर्फ एक जानवर है! मेरी कीमती चीजों के लायक नहीं है। भाग यहां से!”

बंदर मुस्कराया और बोला, “ठीक है, लेकिन याद रखना – घमंड का फल हमेशा कड़वा होता है।”

अर्जुन ने बंदर की बात को नजरअंदाज कर दिया और आगे बढ़ गया। कुछ देर बाद वह एक नदी के किनारे पहुंचा। नदी पार करने के लिए एक छोटी सी नाव थी।

जैसे ही व्यापारी का बेटा नाव में बैठा, अचानक तेज हवा चलने लगी। नाव डगमगाने लगी और अर्जुन का सारा सामान नदी में गिर गया। वह बहुत परेशान हो गया।

तभी वही बंदर वहां आया और बोला, “क्या हुआ व्यापारी के बेटे? अब कहां गया तुम्हारा घमंड?”

अर्जुन ने रोते हुए कहा, “मेरा सारा सामान डूब गया है। अब मैं अपने पिता को क्या मुंह दिखाऊंगा?”

बंदर ने दया दिखाते हुए कहा, “अगर तुम सच्चे दिल से माफी मांगो और अपना घमंड छोड़ दो, तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं।”

अर्जुन ने समझ लिया कि उसकी गलती थी। उसने बंदर से माफी मांगी और कहा, “मुझे माफ कर दो। मैं बहुत घमंडी था। कृपया मेरी मदद करो।”

चतुर बंदर ने नदी में छलांग लगाई और एक-एक करके अर्जुन का सारा सामान बाहर निकाल दिया। अर्जुन बहुत खुश हुआ और बंदर का धन्यवाद किया।

बंदर ने कहा, “याद रखना, घमंड इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। विनम्रता और दया से ही सच्ची खुशी मिलती है।”

उस दिन के बाद व्यापारी का बेटा अर्जुन एक नया इंसान बन गया। वह सभी के साथ विनम्रता से पेश आने लगा और जरूरतमंदों की मदद करने लगा।

शिक्षा: घमंड और अहंकार हमेशा हमारे पतन का कारण बनते हैं। विनम्रता, दया और सभी जीवों के प्रति सम्मान ही सच्ची सफलता की कुंजी है। हमें कभी भी अपनी संपत्ति या स्थिति का घमंड नहीं करना चाहिए।

इस कहानी से हमें यह भी सीखने को मिलता है कि चतुर बंदर की तरह हमें भी दूसरों की मदद करनी चाहिए।

यदि आप और कहानियाँ पढ़ना चाहते हैं, तो व्यापारी का उदय और पतन कहानी देख सकते हैं।

इसके अलावा, बिल्ली और चूहों की कहानी भी बहुत रोचक है।

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