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तोते की अक्ल और राजा की समस्या
बहुत समय पहले की बात है, जब अरब के रेगिस्तान में एक सुंदर राज्य था। उस राज्य का राजा हारून अल-रशीद बहुत न्यायप्रिय और दयालु था। राजा के महल में एक बुद्धिमान तोता रहता था, जिसका नाम हकीम था। यह तोता केवल बोलना ही नहीं जानता था, बल्कि उसमें तोते की अक्ल इतनी तेज़ थी कि वह हर समस्या का समाधान निकाल लेता था।
एक दिन राज्य में बड़ी समस्या आई। पड़ोसी राज्य का राजा जफ़र ने राजा हारून को एक कठिन पहेली भेजी। पहेली के साथ संदेश था – “यदि तुम इस पहेली का उत्तर नहीं दे सकोगे, तो तुम्हें अपना आधा राज्य मुझे देना होगा।”
पहेली यह थी: “वह क्या चीज़ है जो दिन में सोती है, रात में जागती है, बिना पैर के चलती है, और बिना आंखों के देखती है?”
राजा हारून बहुत परेशान हो गया। उसने अपने सभी मंत्रियों, विद्वानों और ज्योतिषियों को बुलाया। सभी ने बहुत सोचा, लेकिन कोई भी सही उत्तर नहीं दे सका। दिन बीतते जा रहे थे और राजा की चिंता बढ़ती जा रही थी।
तीसरे दिन, जब राजा अपने बगीचे में टहल रहा था, तो हकीम तोता उसके पास आया। तोते की अक्ल से वह समझ गया था कि राजा बहुत परेशान है।
“महाराज, आप इतने चिंतित क्यों हैं?” हकीम ने पूछा।
राजा ने पूरी समस्या हकीम को बताई। बुद्धिमान तोता ध्यान से सुनता रहा और फिर मुस्कराया।
“महाराज, यह पहेली बहुत आसान है। उत्तर है – चांद और तारे।”
राजा हैरान रह गया। “लेकिन हकीम, यह कैसे सही उत्तर हो सकता है?”
हकीम ने समझाया: “महाराज, चांद और तारे दिन में दिखाई नहीं देते, मानो वे सो रहे हों। रात में वे चमकते हैं, मानो जाग रहे हों। वे आकाश में बिना पैरों के चलते रहते हैं, और बिना आंखों के पूरी दुनिया को देखते रहते हैं।”
राजा खुशी से झूम उठा। उसने तुरंत राजा जफ़र को उत्तर भेज दिया। जब राजा जफ़र को उत्तर मिला, तो वह बहुत प्रभावित हुआ। उसने राजा हारून को बधाई का संदेश भेजा और दोनों राज्यों के बीच मित्रता की संधि हो गई।
राजा हारून ने हकीम तोते को राज्य की सलाह देने वाला मुख्य सलाहकार बना दिया। अब जब भी कोई कठिन समस्या आती, राजा पहले हकीम से सलाह लेता था।
एक दिन राज्य में अकाल पड़ा। लोग परेशान थे और बारिश नहीं हो रही थी। राजा ने हकीम से पूछा कि क्या करना चाहिए।
तोते की अक्ल से हकीम ने सुझाव दिया: “महाराज, हमें पहाड़ों से पानी लाने के लिए नहरें खुदवानी चाहिए। साथ ही बारिश के पानी को इकट्ठा करने के लिए तालाब बनवाने चाहिए।”
राजा ने हकीम की सलाह मानी। जल्द ही राज्य में नहरों और तालाबों का जाल बिछ गया। जब बारिश आई, तो पानी व्यर्थ नहीं गया और अकाल की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई।
इसके बाद हकीम ने राज्य की कई समस्याओं का समाधान निकाला। व्यापारियों के झगड़े सुलझाए, किसानों की फसल बचाने के तरीके बताए, और शिक्षा व्यवस्था सुधारने के सुझाव दिए। राज्य के लोग बुद्धिमान तोता हकीम का बहुत सम्मान करने लगे। बच्चे उसकी कहानियां सुनने आते और बड़े उससे सलाह लेते।
एक दिन एक छोटा बच्चा हकीम के पास आया और पूछा: “हकीम चाचा, आप इतने समझदार कैसे हैं?”
हकीम ने मुस्कराते हुए कहा: “बेटा, तोते की अक्ल केवल बोलने में नहीं, बल्कि सुनने और समझने में है। मैं हमेशा ध्यान से सुनता हूं, सोचता हूं, और फिर बोलता हूं। तुम भी ऐसा करोगे तो बहुत समझदार बनोगे।”
इस तरह हकीम तोता राज्य का सबसे सम्मानित सलाहकार बन गया। उसकी राज्य की सलाह से राज्य में खुशहाली आई और प्रजा सुखी रहने लगी।
सीख: सच्ची बुद्धिमानी केवल बोलने में नहीं, बल्कि सुनने, समझने और सोच-समझकर काम करने में है। छोटे से छोटा व्यक्ति भी अपनी अक्ल से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान निकाल सकता है।











