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हातिम ताई और शैतान का पेड़
बहुत समय पहले की बात है, जब अरब की धरती पर हातिम ताई नाम का एक महान योद्धा रहता था। वह अपनी वीरता, दानवीरता और न्याय के लिए पूरे संसार में प्रसिद्ध था। लोग कहते थे कि हातिम ताई के सामने कोई भी समस्या टिक नहीं सकती।
एक दिन हातिम ताई के पास एक बूढ़ा व्यापारी आया। उसका चेहरा डर से पीला पड़ा हुआ था और आँखों में आंसू थे। “हे महान योद्धा!” वह रोते हुए बोला, “मेरी मदद करिए। मेरा बेटा एक भयानक जादुई पेड़ के कारण गायब हो गया है।”
हातिम ताई ने धैर्य से पूछा, “क्या हुआ था? सब कुछ विस्तार से बताओ।”
बूढ़े व्यापारी ने कांपती आवाज में कहा, “जंगल के बीच में एक विशाल पेड़ है जिसे शैतान का पेड़ कहते हैं। कहते हैं कि उस पेड़ में एक दुष्ट जिन्न रहता है जो राहगीरों को अपने जाल में फंसा लेता है। मेरा बेटा उसी रास्ते से गुजर रहा था।”
हातिम ताई का दिल दया से भर गया। उन्होंने तुरंत अपनी तलवार उठाई और कहा, “चिंता मत करो। मैं तुम्हारे बेटे को वापस लाऊंगा।”
अगली सुबह हातिम ताई अपने विश्वसनीय घोड़े पर सवार होकर उस जंगल की ओर निकले जहाँ शैतान का पेड़ था। रास्ते में उन्हें कई लोग मिले जिन्होंने उन्हें चेतावनी दी।
“हातिम ताई, वापस लौट जाओ!” एक बुजुर्ग ने कहा। “उस पेड़ के पास जाने वाला कोई भी व्यक्ति वापस नहीं आया है।”
लेकिन हातिम ताई का संकल्प अटूट था। वे आगे बढ़ते रहे। जैसे-जैसे वे जंगल के अंदर जाते गए, हवा में एक अजीब सी खुशबू आने लगी और चारों ओर अंधेरा छाने लगा।
अचानक उन्हें दूर से एक विशालकाय पेड़ दिखाई दिया। यह पेड़ इतना बड़ा था कि इसकी छाया में पूरा गांव समा सकता था। पेड़ की शाखाएं काली और मुड़ी हुई थीं, और उसके तने से एक डरावनी आवाज आ रही थी।
जैसे ही हातिम ताई पेड़ के पास पहुंचे, अचानक पेड़ की जड़ों से काली धुआं निकला और एक भयानक जिन्न प्रकट हुआ। उसकी आंखें लाल थीं और दांत नुकीले थे।
“कौन है जो मेरे क्षेत्र में आने का साहस कर रहा है?” जिन्न ने गरजते हुए कहा।
हातिम ताई निडर होकर बोले, “मैं हातिम ताई हूं। तुमने जो निर्दोष लोगों को कैद किया है, उन्हें तुरंत छोड़ दो।”
जिन्न हंसा, “हा हा हा! तुम भी उन्हीं की तरह मेरे कैदी बन जाओगे। देखो, यह शैतान का पेड़ कितना शक्तिशाली है!”
अचानक पेड़ की शाखाएं हातिम ताई की ओर झुकीं और उन्हें पकड़ने की कोशिश करने लगीं। लेकिन हातिम ताई बहुत तेज थे। वे अपनी तलवार से शाखाओं को काटते गए।
जिन्न ने देखा कि हातिम ताई साधारण योद्धा नहीं हैं। उसने अपना असली रूप दिखाया और आकाश में उड़ने लगा। “अगर तुम में हिम्मत है तो मेरी तीन परीक्षाओं में सफल हो जाओ। तभी मैं कैदियों को छोड़ूंगा।”
हातिम ताई ने स्वीकार किया। पहली परीक्षा में जिन्न ने हातिम ताई के सामने सोने का एक पहाड़ रख दिया। “यह सब तुम्हारा है, बस तुम यहाँ से चले जाओ।”
लेकिन हातिम ताई ने कहा, “मैं धन के लिए नहीं, न्याय के लिए आया हूं।” और उन्होंने सोने को ठुकरा दिया।
दूसरी परीक्षा में जिन्न ने हातिम ताई को भयानक राक्षसों से लड़ने को कहा। हातिम ताई ने अपनी तलवार से सभी राक्षसों को हरा दिया।
तीसरी और अंतिम परीक्षा में जिन्न ने कहा, “तुम्हें इस शैतान के पेड़ की जड़ में छुपा हुआ एक जादुई फल लाना होगा। लेकिन जो भी उसे छूएगा, वह पत्थर बन जाएगा।”
हातिम ताई ने सोचा और फिर अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपनी तलवार से फल को काटा, उसे छुआ नहीं। जैसे ही फल कटा, शैतान का पेड़ हिलने लगा और उसकी जादुई शक्ति खत्म हो गई।
जिन्न चिल्लाया, “नहीं! मेरी शक्ति खत्म हो गई!” और वह धुएं बनकर गायब हो गया।
अचानक पेड़ के अंदर से कई आवाजें आईं। व्यापारी का बेटा और अन्य कैदी लोग बाहर निकले। सभी हातिम ताई के पैर छूकर उनका धन्यवाद करने लगे।
“आपने हमारी जान बचाई है, हे महान योद्धा!” व्यापारी के बेटे ने कहा।
हातिम ताई मुस्कराए और बोले, “यह मेरा कर्तव्य था। न्याय और सच्चाई की जीत हमेशा होती है।”
जब हातिम ताई सभी को लेकर वापस गांव पहुंचे, तो पूरा गांव खुशी से नाच उठा। बूढ़े व्यापारी ने अपने बेटे को गले लगाया और हातिम ताई को असंख्य धन्यवाद दिए।
उस दिन के बाद शैतान का पेड़ एक साधारण पेड़ बन गया और उस जंगल से राहगीर निडर होकर गुजरने लगे। हातिम ताई की वीरता की यह कहानी पूरे अरब में फैल गई।
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चाई, वीरता और दूसरों की मदद करने की भावना से कोई भी कठिनाई को पार किया जा सकता है। हातिम ताई ने दिखाया कि धन और डर के सामने झुकना नहीं चाहिए, बल्कि न्याय के लिए लड़ना चाहिए। जब हम दूसरों की भलाई के लिए काम करते हैं, तो भगवान हमारी मदद करते हैं।
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