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हातिम ताई और दो लड़ते जिन्न की कहानी
बहुत समय पहले की बात है, जब अरब के रेगिस्तान में हातिम ताई नाम का एक बहादुर और दयालु योद्धा रहता था। वह अपनी वीरता और उदारता के लिए पूरे अरब में प्रसिद्ध था। एक दिन हातिम ताई अपने घोड़े पर सवार होकर एक लंबी यात्रा पर निकला।
रास्ते में उसे एक पुराना कुआं दिखाई दिया। कुएं के पास एक बूढ़ा आदमी बैठा रो रहा था। हातिम ताई ने अपना घोड़ा रोका और पूछा, “बाबा जी, आप क्यों रो रहे हैं? क्या मैं आपकी कोई सहायता कर सकता हूं?”
बूढ़े आदमी ने आंसू पोंछते हुए कहा, “बेटा, इस कुएं में दो लड़ते जिन्न रहते हैं। वे दिन-रात लड़ते रहते हैं और इनकी आवाज से पूरा गांव परेशान है। न तो हम सो सकते हैं, न ही बच्चे खेल सकते हैं। इनके डर से सभी लोग यहां से पानी भी नहीं भर सकते।”
हातिम ताई ने कुएं की तरफ देखा। वाकई वहां से अजीब आवाजें आ रही थीं। दो आवाजें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। हातिम ताई ने हिम्मत करके कुएं के पास जाकर आवाज लगाई, “अरे जिन्न भाइयों! मैं हातिम ताई हूं। तुम लोग इतना क्यों लड़ रहे हो?”
अचानक कुएं से धुआं निकला और दो विशाल जिन्न प्रकट हुए। एक जिन्न लाल रंग का था और दूसरा नीले रंग का। दोनों बहुत गुस्से में थे।
लाल जिन्न ने गरजते हुए कहा, “मैं इस कुएं का असली मालिक हूं! यह नीला जिन्न यहां से चला जाए!”
नीला जिन्न चिल्लाया, “नहीं! मैं पहले यहां आया था। यह लाल जिन्न झूठ बोल रहा है!”
हातिम ताई ने शांति से कहा, “रुको भाइयों! लड़ने से कोई समस्या हल नहीं होती। बताओ, तुम दोनों यहां क्यों रहना चाहते हो?”
लाल जिन्न ने कहा, “इस कुएं का पानी जादुई है। जो भी इसे पीता है, वह बहुत ताकतवर हो जाता है।”
नीला जिन्न बोला, “हां, और मैं इस ताकत का इस्तेमाल अच्छे काम के लिए करना चाहता हूं। लेकिन यह लाल जिन्न बुरे काम करना चाहता है।”
लाल जिन्न गुस्से से बोला, “यह झूठ है! मैं भी अच्छे काम करना चाहता हूं।”
हातिम ताई ने सोचा और फिर कहा, “अगर तुम दोनों सच में अच्छे काम करना चाहते हो, तो मैं तुम्हें एक रास्ता बताता हूं। तुम दोनों मिलकर इस गांव के लोगों की मदद करो। दो लड़ते जिन्न से कहीं बेहतर दो मित्र जिन्न हैं।”
दोनों जिन्न एक-दूसरे को देखने लगे। हातिम ताई ने आगे कहा, “देखो, यह बूढ़ा आदमी कितना परेशान है। पूरा गांव डरा हुआ है। अगर तुम दोनों मिलकर काम करो, तो इन सभी की मदद कर सकते हो।”
नीले जिन्न ने पहले हाथ बढ़ाया और कहा, “हातिम ताई सही कह रहा है। क्या हम दोस्त बन सकते हैं?”
लाल जिन्न ने थोड़ी देर सोचा और फिर मुस्कराते हुए नीले जिन्न का हाथ मिलाया। “हां भाई, चलो मिलकर अच्छे काम करते हैं।”
दोनों जिन्न ने मिलकर कुएं को साफ किया और उसमें मीठा पानी भर दिया। उन्होंने गांव के सूखे खेतों में पानी पहुंचाया और बीमार लोगों को ठीक किया। हातिम ताई यह सब देखकर बहुत खुश हुआ।
बूढ़े आदमी ने हातिम ताई के पैर छूकर कहा, “बेटा, तुमने हमारी बहुत बड़ी मदद की है। तुमने हमें सिखाया कि लड़ाई से कुछ नहीं मिलता, बल्कि मिलकर काम करने से सब कुछ संभव है।”
दोनों जिन्न ने हातिम ताई को धन्यवाद दिया और कहा, “आपने हमें सिखाया कि दोस्ती लड़ाई से कहीं बेहतर है। अब हम हमेशा मिलकर लोगों की मदद करेंगे।”
हातिम ताई ने मुस्कराते हुए कहा, “यही तो जिंदगी का असली मतलब है। जब हम मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी मुश्किल आसान हो जाती है।”
उस दिन के बाद दो लड़ते जिन्न कभी नहीं लड़े। वे हमेशा मिलकर गांव वालों की मदद करते रहे। गांव में खुशी और शांति छा गई। लोग फिर से कुएं से पानी भरने लगे और बच्चे खुशी से खेलने लगे।
हातिम ताई ने अपनी यात्रा जारी रखी, लेकिन उसका दिल इस बात से भरा था कि उसने दो दुश्मनों को दोस्त बनाने में मदद की थी। वह जानता था कि सच्ची जीत लड़ाई जीतने में नहीं, बल्कि दिलों को जीतने में है।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि लड़ाई-झगड़े से कभी कुछ अच्छा नहीं होता। जब हम मिलकर काम करते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं, तो हर समस्या का समाधान मिल जाता है। दोस्ती और प्रेम की शक्ति सबसे बड़ी होती है।
इससे पहले की कहानी में समझदार बंदर की कहानी में भी हमें मिलकर काम करने का महत्व बताया गया है।
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