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दोषी कौन – अकबर बीरबल की कहानी
मुगल सम्राट अकबर के दरबार में एक दिन बहुत हंगामा मचा हुआ था। दरबार के सभी मंत्री और दरबारी परेशान दिख रहे थे। बादशाह अकबर भी चिंतित थे।
“क्या बात है? आज दरबार में इतनी बेचैनी क्यों है?” बीरबल ने दरबार में प्रवेश करते ही पूछा।
अकबर ने गंभीर स्वर में कहा, “बीरबल, आज रात महल के खजाने से सोने की मुहरें चोरी हो गई हैं। पहरेदारों का कहना है कि उन्होंने किसी को आते-जाते नहीं देखा।“
“दोषी कौन है, यह पता लगाना होगा,” बीरबल ने सोचते हुए कहा। “जहांपनाह, क्या मैं सभी पहरेदारों से मिल सकता हूं?”
अकबर ने तुरंत सभी पहरेदारों को बुलवाया। पांच पहरेदार दरबार में हाजिर हुए। सभी डरे हुए और परेशान लग रहे थे।
बीरबल ने पहले पहरेदार से पूछा, “तुमने रात में कुछ अजीब देखा था?“
“नहीं हुजूर, मैंने तो कुछ नहीं देखा। मैं तो पूरी रात जागता रहा,” पहले पहरेदार ने कांपती आवाज में कहा।
दूसरे पहरेदार ने कहा, “मैं भी पूरी रात अपनी जगह पर था। मुझे कुछ पता नहीं चला।“
तीसरे और चौथे पहरेदार ने भी यही कहा। लेकिन जब बीरबल ने पांचवें पहरेदार से पूछा, तो वह बोला, “हुजूर, मैं रात में थोड़ी देर सो गया था, लेकिन कोई आवाज सुनाई दी तो मैं जाग गया। फिर मैंने चारों तरफ देखा, कुछ नहीं था।“
बीरबल मुस्कराया और बोला, “जहांपनाह, मुझे एक दिन का समय दीजिए। कल मैं बताऊंगा कि दोषी कौन है।“
अगले दिन बीरबल दरबार में आया और सभी पहरेदारों को फिर से बुलवाया। उसके हाथ में पांच छड़ियां थीं, सभी एक जैसी लंबी।
“ये जादुई छड़ियां हैं,” बीरबल ने कहा। “जो व्यक्ति चोर है, उसकी छड़ी कल तक एक इंच बढ़ जाएगी। आप सभी इन्हें घर ले जाइए और कल वापस लेकर आइए।“
सभी पहरेदारों ने छड़ियां ली और घर चले गए। असली चोर बहुत परेशान था। उसने सोचा, “अगर मेरी छड़ी बढ़ गई तो मैं पकड़ा जाऊंगा। क्यों न मैं इसे एक इंच छोटा कर दूं?“
रात भर वह परेशान रहा और सुबह होते ही उसने छड़ी का एक इंच काट दिया।
अगले दिन जब सभी पहरेदार अपनी छड़ियां लेकर आए, तो बीरबल ने सभी छड़ियों को देखा। चार छड़ियां तो वैसी ही थीं, लेकिन पांचवें पहरेदार की छड़ी एक इंच छोटी थी।
“दोषी कौन है, अब यह साफ हो गया,” बीरबल ने मुस्कराते हुए कहा। “पांचवां पहरेदार ही चोर है। डर के कारण इसने अपनी छड़ी काट दी है।“
पांचवां पहरेदार घबराकर अकबर के सामने गिर पड़ा और बोला, “माफ करें जहांपनाह! मैंने ही चोरी की है। मुझे लगा कि छड़ी सच में जादुई है।“
अकबर बीरबल की बुद्धिमत्ता देखकर बहुत खुश हुआ। “वाह बीरबल! तुमने बिना किसी जादू के सच्चाई का पता लगा लिया।“
बीरबल ने कहा, “जहांपनाह, अपराधी का मन हमेशा डरा रहता है। डर ही उसे पकड़वा देता है। छड़ी में कोई जादू नहीं था, बस अपराधी के मन का डर था।“
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चाई हमेशा सामने आ जाती है। अपराधी का मन हमेशा डरा रहता है और यही डर उसे पकड़वा देता है। हमें हमेशा सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए और कभी भी गलत काम नहीं करना चाहिए।
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