Summarize this Article with:

दो सियार और ढोल की कहानी
बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल में दो सियार रहते थे। एक का नाम था चतुर और दूसरे का नाम था लालची। दोनों मित्र थे लेकिन उनके स्वभाव में बहुत अंतर था। चतुर हमेशा सोच-समझकर काम करता था, जबकि लालची जल्दबाजी में फैसले लेता था।
एक दिन जंगल में तेज़ आंधी आई। आंधी के बाद दोनों सियार भोजन की तलाश में निकले। चलते-चलते वे एक पुराने युद्ध के मैदान में पहुंचे। वहां उन्हें एक बड़ा ढोल दिखाई दिया जो एक पेड़ की डाली से टकरा रहा था।
“धम-धम, धम-धम” की आवाज़ सुनकर लालची सियार डर गया। उसने कहा, “चतुर भाई, यह कैसी डरावनी आवाज़ है! लगता है कोई बहुत बड़ा और खतरनाक जानवर है।”
लेकिन चतुर सियार ने ध्यान से देखा। उसने कहा, “लालची भाई, घबराओ मत। यह सिर्फ एक ढोल है जो हवा से हिल रहा है और पेड़ की डाली से टकरा रहा है।”
लालची ने कहा, “लेकिन इतनी तेज़ आवाज़! ज़रूर इसके अंदर कोई बड़ा जानवर होगा। अगर हम इसे मार दें तो हमें बहुत सारा मांस मिलेगा।”
चतुर ने समझाया, “भाई, पहले जांच लेते हैं कि यह क्या है। हमें जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।”
लेकिन लालची का लालच बढ़ता जा रहा था। उसने कहा, “नहीं भाई, इतनी तेज़ आवाज़ करने वाले में ज़रूर बहुत मांस होगा। मैं इसे अभी फाड़ता हूं।”
चतुर ने रोकने की कोशिश की, “रुको लालची! पहले देखते हैं कि यह क्या है। कभी-कभी बड़ी आवाज़ करने वाली चीज़ें अंदर से खाली होती हैं।”
लेकिन लालची ने चतुर की बात नहीं सुनी। उसने अपने तेज़ पंजों से ढोल को फाड़ दिया। जैसे ही ढोल फटा, उसमें से सिर्फ हवा निकली। अंदर कुछ भी नहीं था – न मांस, न कोई जानवर।
लालची बहुत निराश हुआ। उसने कहा, “अरे! यह तो बिल्कुल खाली है। इतनी तेज़ आवाज़ के बावजूद भी इसमें कुछ नहीं है।”
चतुर ने मुस्कराते हुए कहा, “मैंने तुमसे कहा था न कि पहले जांच लेते हैं। दो सियार और ढोल की यह घटना हमें सिखाती है कि हमेशा बाहरी दिखावे पर भरोसा नहीं करना चाहिए।”
लालची को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने कहा, “तुम सही कह रहे थे, चतुर भाई। मैंने जल्दबाजी में काम किया और अब हमारे पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है।”
चतुर ने प्यार से कहा, “कोई बात नहीं, भाई। अब हम दोनों मिलकर धैर्य से भोजन की तलाश करेंगे। जल्दबाजी में लिए गए फैसले अक्सर गलत होते हैं।”
उस दिन के बाद से लालची ने भी सोच-समझकर काम करना सीखा। दो सियार और ढोल की इस घटना ने उसे जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ सिखाया।
शिक्षा: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी बाहरी दिखावे या आवाज़ से प्रभावित होकर जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए। धैर्य रखकर और सोच-समझकर काम करने से ही सफलता मिलती है। लालच और जल्दबाजी हमेशा नुकसान पहुंचाते हैं।
यदि आप और कहानियाँ पढ़ना चाहते हैं, तो सियार और लड़ते बकरों की कहानी देखें।
या फिर व्यापारी का उदय और पतन की कहानी पढ़ें, जो धैर्य और समझदारी पर आधारित है।













