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हातिम ताई की दरियादिली और बीरबल की बुद्धि
एक दिन बादशाह अकबर के दरबार में एक अजीब सा मामला आया। एक व्यापारी ने शिकायत की कि उसका पड़ोसी हमेशा गरीबों की मदद करता रहता है और अपना सारा धन दान में दे देता है। व्यापारी को लगता था कि यह सब दिखावा है।
“हुजूर, यह आदमी हातिम ताई की दरियादिली का नाटक करता है। मैं चाहता हूं कि आप इसकी जांच करवाएं,” व्यापारी ने कहा।
बादशाह अकबर ने बीरबल की तरफ देखा। बीरबल समझ गया कि यह मामला केवल जांच का नहीं, बल्कि सच्ची दरियादिली को पहचानने का है।
“जहांपनाह, मैं इस मामले की जांच करूंगा,” बीरबल ने कहा।
अगले दिन बीरबल एक गरीब भिखारी का भेष धारण करके उस व्यक्ति के घर गया जिसके बारे में शिकायत थी। उसका नाम रहीम था। बीरबल ने देखा कि रहीम सच में गरीबों की मदद कर रहा था।
“भाई साहब, मुझे खाना चाहिए। मैं बहुत भूखा हूं,” बीरबल ने भिखारी बनकर कहा।
रहीम तुरंत अपने घर से खाना लेकर आया। उसने न केवल बीरबल को खाना दिया बल्कि कुछ पैसे भी दिए।
“यह लो भाई, और कल भी आना अगर जरूरत हो,” रहीम ने मुस्कराते हुए कहा।
बीरबल ने देखा कि रहीम की हातिम ताई की दरियादिली बिल्कुल सच्ची थी। वह दिखावे के लिए नहीं, बल्कि दिल से मदद करता था।
तीसरे दिन बीरबल ने एक और परीक्षा ली। उसने एक अमीर व्यापारी का भेष धारण किया और रहीम के पास गया।
“मैं एक बड़ा व्यापारी हूं। अगर तुम मेरे साथ व्यापार करो तो बहुत पैसा कमा सकते हो,” बीरबल ने कहा।
रहीम ने जवाब दिया, “साहब, मैं सिर्फ उतना ही कमाता हूं जितनी मेरी जरूरत है। बाकी सब गरीबों में बांट देता हूं। यही मेरी खुशी है।”
बीरबल समझ गया कि रहीम की दरियादिली हातिम ताई जैसी ही सच्ची और निस्वार्थ है।
चौथे दिन बीरबल दरबार में वापस आया। उसने बादशाह अकबर को सारी बात बताई।
“हुजूर, रहीम की हातिम ताई की दरियादिली बिल्कुल सच्ची है। वह दिखावे के लिए नहीं, बल्कि दिल से मदद करता है,” बीरबल ने कहा।
फिर बीरबल ने व्यापारी की तरफ देखा और कहा, “और आप जो शिकायत लेकर आए थे, वह सिर्फ जलन के कारण थी। सच्ची दरियादिली को पहचानना भी एक कला है।”
बादशाह अकबर ने रहीम को दरबार में बुलवाया और उसकी हातिम ताई की दरियादिली की प्रशंसा की। उन्होंने उसे इनाम भी दिया।
“रहीम, तुम्हारी दरियादिली सच में हातिम ताई जैसी है। तुम हमारे राज्य के लिए गर्व की बात हो,” बादशाह ने कहा।
रहीम ने विनम्रता से कहा, “हुजूर, यह इनाम भी मैं गरीबों में बांट दूंगा। यही मेरी खुशी है।”
व्यापारी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने रहीम से माफी मांगी और खुद भी गरीबों की मदद करने का वादा किया।
बीरबल ने मुस्कराते हुए कहा, “जहांपनाह, सच्ची हातिम ताई की दरियादिली वही है जो बिना दिखावे के, दिल से की जाए। यह सिर्फ पैसे देने की बात नहीं, बल्कि मानवता की सेवा करने की बात है।”
शिक्षा: सच्ची दरियादिली वह है जो दिल से की जाए, दिखावे के लिए नहीं। हातिम ताई की दरियादिली का मतलब है निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करना। हमें दूसरों की अच्छाइयों में बुराई ढूंढने के बजाय उनसे सीखना चाहिए। सच्ची दरियादिली और मानवता की सेवा के बारे में और जानें।













