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रसगुल्ले की जड़ – अकबर बीरबल की कहानी
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन बहुत ही मजेदार घटना घटी। उस दिन दरबार में सभी दरबारी अपने-अपने स्थान पर बैठे हुए थे। अचानक बादशाह अकबर ने अपने प्रिय मंत्री बीरबल से एक अजीब सा सवाल पूछा।
“बीरबल, हमें यह बताओ कि रसगुल्ले की जड़ कहाँ होती है?” बादशाह अकबर ने मुस्कराते हुए पूछा।
यह सुनकर सभी दरबारी हैरान रह गए। कोई समझ नहीं पा रहा था कि बादशाह का क्या मतलब है। रसगुल्ले तो मिठाई होती है, उसकी जड़ कैसी? सभी दरबारी आपस में फुसफुसाने लगे।
एक दरबारी ने कहा, “हुजूर, रसगुल्ले तो दूध से बनते हैं, तो शायद इसकी जड़ गाय में है।”
दूसरे दरबारी ने कहा, “नहीं महाराज, रसगुल्ले चीनी की चाशनी में बनते हैं, तो इसकी जड़ गन्ने में होनी चाहिए।”
तीसरे दरबारी ने अपनी राय दी, “हुजूर, रसगुल्ले की जड़ तो हलवाई की दुकान में होती है।”
सभी दरबारी अपने-अपने जवाब दे रहे थे, लेकिन बादशाह अकबर किसी के जवाब से संतुष्ट नहीं लग रहे थे। वे बार-बार अपना सिर हिला रहे थे।
अंत में बादशाह अकबर ने बीरबल की तरफ देखा और कहा, “बीरबल, तुम क्या कहते हो? रसगुल्ले की जड़ कहाँ होती है?”
बीरबल ने थोड़ी देर सोचा और फिर मुस्कराते हुए कहा, “जहाँपनाह, रसगुल्ले की जड़ तो दाँत में होती है।”
यह सुनकर सभी दरबारी और भी हैरान हो गए। बादशाह अकबर भी समझ नहीं पाए कि बीरबल का क्या मतलब है।
“बीरबल, यह कैसे संभव है? दाँत में रसगुल्ले की जड़ कैसे हो सकती है?” बादशाह ने पूछा।
बीरबल ने विनम्रता से जवाब दिया, “हुजूर, रसगुल्ले की जड़ दाँत में इसलिए होती है क्योंकि जब हम रसगुल्ला खाते हैं तो वह दाँत से ही शुरू होता है। दाँत ही रसगुल्ले को चबाते हैं और उसका स्वाद हमें मिलता है। अगर दाँत न हों तो हम रसगुल्ले का आनंद ही नहीं ले सकते।”
बीरबल ने आगे कहा, “महाराज, रसगुल्ले की असली जड़ तो हमारे दाँत में ही है। दाँत के बिना न तो हम रसगुल्ला खा सकते हैं और न ही उसका मजा ले सकते हैं। इसलिए रसगुल्ले की जड़ दाँत में होती है।”
यह सुनकर बादशाह अकबर बहुत खुश हुए। उन्होंने तालियाँ बजाईं और कहा, “वाह बीरबल! तुमने बिल्कुल सही कहा। रसगुल्ले की जड़ वाकई दाँत में ही होती है।”
सभी दरबारी भी बीरबल की बुद्धिमानी की तारीफ करने लगे। उन्हें समझ आ गया कि बीरबल ने कितनी चतुराई से इस सवाल का जवाब दिया था।
बादशाह अकबर ने बीरबल को इनाम देते हुए कहा, “बीरबल, तुम्हारी बुद्धि का कोई जवाब नहीं। तुमने आज फिर से साबित कर दिया कि तुम सबसे अलग सोचते हो।”
उस दिन के बाद से दरबार में जब भी कोई रसगुल्ले की बात करता, तो सभी को बीरबल का यह जवाब याद आ जाता कि रसगुल्ले की जड़ दाँत में होती है।
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हर सवाल का जवाब अलग नजरिए से सोचने पर मिल सकता है। बीरबल ने दिखाया कि समस्या को अलग तरीके से देखने पर नए और रचनात्मक समाधान मिल सकते हैं। हमें भी जीवन में आने वाली समस्याओं को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
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