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किस नदी का पानी सबसे अच्छा – बीरबल की बुद्धि
मुगल सम्राट अकबर के दरबार में एक दिन एक विशेष सभा का आयोजन हुआ। देश के विभिन्न प्रांतों से आए राजदूत और विद्वान अपने-अपने क्षेत्र की नदियों की महानता के बारे में चर्चा कर रहे थे।
बंगाल का राजदूत गर्व से बोला, “महाराज, गंगा नदी का पानी सबसे पवित्र और श्रेष्ठ है। इसमें स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं।”
दक्षिण का प्रतिनिधि तुरंत खड़ा हुआ, “नहीं महाराज, कावेरी नदी का पानी सबसे मधुर और स्वादिष्ट है। इसके किनारे उगने वाले चावल की मिठास पूरे भारत में प्रसिद्ध है।”
पंजाब का दूत भी अपनी बात रखने लगा, “सरस्वती नदी का पानी सबसे शुद्ध है। यह ज्ञान और बुद्धि प्रदान करती है।”
इस प्रकार सभी अपनी-अपनी नदियों की प्रशंसा करने लगे। यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा – हर नदी के समर्थक अपने तर्क दे रहे थे।
अकबर बादशाह इस बहस को सुनकर परेशान हो गए। वे समझ नहीं पा रहे थे कि किस नदी का पानी सबसे अच्छा है। आखिरकार उन्होंने बीरबल की ओर देखा।
“बीरबल, तुम्हारा क्या मत है? किस नदी का पानी वास्तव में सबसे अच्छा है?” अकबर ने प्रश्न किया।
बीरबल मुस्कराए और बोले, “जहांपनाह, यह प्रश्न बहुत गहरा है। मुझे इसका उत्तर देने के लिए कुछ समय चाहिए।”
अगले दिन बीरबल ने दरबार में एक प्रयोग का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, “महाराज, आइए हम सभी नदियों के पानी का वास्तविक परीक्षण करें।”
बीरबल ने विभिन्न नदियों से पानी मंगवाया। गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, सरस्वती – सभी प्रमुख नदियों का पानी सुंदर घड़ों में रखा गया।
फिर बीरबल ने एक चतुर योजना बनाई। उन्होंने दरबारियों से कहा, “आज हम सभी दिन भर उपवास रखेंगे। शाम को जब हमें बहुत प्यास लगेगी, तब हम इन सभी नदियों के पानी का स्वाद चखेंगे।”
सभी दरबारी इस प्रयोग के लिए तैयार हो गए। दिन भर कोई भी पानी नहीं पिया। शाम होते-होते सभी को तेज प्यास लगने लगी।
जब सूर्यास्त का समय आया, तो बीरबल ने सभी घड़े सामने रखवाए। लेकिन एक चालाकी की – उन्होंने सभी घड़ों के नाम छुपा दिए।
“अब बताइए, कौन सा पानी सबसे अच्छा लगा?” बीरबल ने पूछा।
अकबर और सभी दरबारियों ने बड़े चाव से पानी पिया। प्यास से व्याकुल होने के कारण हर घूंट अमृत के समान लग रहा था।
सभी ने एक स्वर में कहा, “बीरबल, सभी पानी एक जैसा ही स्वादिष्ट लग रहा है। हमें कोई अंतर नजर नहीं आ रहा।”
तब बीरबल ने घड़ों के नाम प्रकट किए। सभी आश्चर्यचकित रह गए।
बीरबल ने समझाया, “जहांपनाह, जब हमें वास्तविक प्यास लगी थी, तो हर नदी का पानी समान रूप से मधुर लगा। यही सच्चाई है।”
“किस नदी का पानी सबसे अच्छा है” – इस प्रश्न का उत्तर देते हुए बीरबल ने कहा, “महाराज, प्यासे के लिए हर नदी का पानी अमृत के समान है। गंगा हो या यमुना, नर्मदा हो या गोदावरी – सभी नदियां मां के समान हैं।”
“जो व्यक्ति वास्तव में प्यासा है, उसके लिए किसी भी नदी का पानी सबसे अच्छा होता है। लेकिन जो व्यक्ति प्यासा नहीं है, वह सबसे पवित्र गंगाजल में भी दोष निकालेगा।”
अकबर बादशाह बीरबल की बुद्धिमत्ता से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने समझा कि नदियों में भेदभाव करना गलत है।
“बीरबल, तुमने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि सच्ची बुद्धि यही है कि हम प्रकृति के सभी उपहारों का सम्मान करें।”
सभी राजदूत और दरबारी बीरबल की इस शिक्षा से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने समझा कि हर नदी अपने आप में विशेष है और सभी का अपना महत्व है।
शिक्षा: यह कहानी हमें सिखाती है कि प्रकृति के सभी उपहार समान रूप से मूल्यवान हैं। जरूरत के समय हर चीज अमूल्य हो जाती है। हमें किसी भी चीज में भेदभाव नहीं करना चाहिए और सभी नदियों, पर्वतों और प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करना चाहिए। सच्ची बुद्धि यही है कि हम सभी के महत्व को समझें।















