Summarize this Article with:

लकड़हारा और सुनहरी कुल्हाड़ी – ईमानदारी की जीत
बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल के पास एक छोटा सा गाँव था। उस गाँव में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह रोज जंगल जाकर लकड़ी काटता और बाजार में बेचकर अपना और अपनी बूढ़ी माँ का पेट पालता था।
रामू के पास एक पुरानी लोहे की कुल्हाड़ी थी, जो उसके पिता की निशानी थी। वह उसे बहुत संभालकर रखता था। एक दिन रामू जंगल में एक बड़े पेड़ के नीचे लकड़ी काट रहा था। पेड़ के पास एक गहरा तालाब था जिसका पानी बिल्कुल साफ और चमकदार था।
अचानक रामू के हाथ से कुल्हाड़ी फिसलकर तालाब में गिर गई। “हाय राम! अब मैं क्या करूंगा?” रामू रोने लगा। बिना कुल्हाड़ी के वह लकड़ी कैसे काटेगा और अपनी माँ को कैसे खिलाएगा?
तभी तालाब के पानी में से एक सुंदर हंस निकला। हंस के पंख सफेद चाँदी की तरह चमक रहे थे। हंस ने कहा, “क्यों रो रहे हो, लकड़हारे?”
रामू ने अपनी सारी कहानी हंस को सुनाई। हंस ने कहा, “चिंता मत करो, मैं तुम्हारी मदद करूंगा।” यह कहकर हंस तालाब में गोता लगाया।
कुछ देर बाद हंस एक सुनहरी कुल्हाड़ी लेकर बाहर आया। कुल्हाड़ी इतनी चमकदार थी कि सूरज की रोशनी में सोने की तरह दमक रही थी। हंस ने पूछा, “क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?”
रामू ने सुनहरी कुल्हाड़ी को देखा। वह जानता था कि यह बहुत कीमती है और इसे बेचकर वह अमीर बन सकता है। लेकिन रामू एक ईमानदार व्यक्ति था। उसने कहा, “नहीं, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है। मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की थी।”
हंस फिर से तालाब में गया और इस बार एक चाँदी की कुल्हाड़ी लेकर आया। वह भी बहुत सुंदर और चमकदार थी। हंस ने फिर पूछा, “क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?”
रामू ने चाँदी की कुल्हाड़ी को भी देखा। यह भी बहुत कीमती थी, लेकिन रामू ने फिर से सच कहा, “नहीं, यह भी मेरी नहीं है। मेरी कुल्हाड़ी साधारण लोहे की थी।”
हंस तीसरी बार तालाब में गया और रामू की असली लोहे की कुल्हाड़ी लेकर आया। रामू खुशी से चिल्लाया, “हाँ! यही मेरी कुल्हाड़ी है!”
हंस रामू की ईमानदारी से बहुत प्रभावित हुआ। उसने कहा, “तुम बहुत ईमानदार हो, रामू। तुमने लालच नहीं किया और सच बोला। इसलिए मैं तुम्हें तीनों कुल्हाड़ियाँ देता हूँ – सुनहरी, चाँदी की और लोहे की।”
रामू अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर सका। उसने हंस का धन्यवाद किया और तीनों कुल्हाड़ियाँ लेकर घर गया। उसने सुनहरी और चाँदी की कुल्हाड़ी बेचकर अपनी माँ के लिए एक अच्छा घर बनवाया और खुशी से रहने लगा।
गाँव में रामू की कहानी फैल गई। एक लालची व्यक्ति श्याम ने यह सुना और सोचा कि वह भी यही तरीका अपनाएगा। अगले दिन श्याम जानबूझकर अपनी कुल्हाड़ी तालाब में फेंक दी।
हंस फिर से आया और सुनहरी कुल्हाड़ी दिखाई। श्याम लालच में आकर बोला, “हाँ, यही मेरी कुल्हाड़ी है!” हंस समझ गया कि यह झूठ बोल रहा है। हंस ने कहा, “तुम झूठे और लालची हो। तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा।” यह कहकर हंस तालाब में गायब हो गया।
श्याम को अपनी कुल्हाड़ी भी वापस नहीं मिली और वह खाली हाथ घर लौटा।
सीख: इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि ईमानदारी और सच्चाई हमेशा फल देती है। लालच और झूठ का परिणाम हमेशा बुरा होता है। जो व्यक्ति सच्चा और ईमानदार होता है, भगवान उसकी मदद करते हैं। रामू की तरह हमें भी हमेशा सच बोलना चाहिए, चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न हो।














