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जल्दी बुलाकर लाओ – बीरबल की तत्परता की कहानी
बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन बहुत महत्वपूर्ण सभा होने वाली थी। सुबह से ही दरबार में चहल-पहल थी। अकबर बादशाह अपने सिंहासन पर बैठे हुए दरबारियों का इंतजार कर रहे थे।
अचानक एक सेवक दौड़ता हुआ आया और बोला, “जहांपनाह, पड़ोसी राज्य के राजा का दूत आया है। वह कहता है कि उसके पास बहुत जरूरी संदेश है।”
अकबर बादशाह ने तुरंत आदेश दिया, “जल्दी बुलाकर लाओ उस दूत को। देर मत करो।”
सेवक भागा गया, लेकिन कुछ देर बाद खाली हाथ वापस आया। उसने कहा, “महाराज, दूत कहता है कि वह केवल बीरबल साहब से मिलेगा। वह कहता है कि संदेश बहुत गुप्त है।”
अकबर को थोड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा, “अच्छा, तो बीरबल को जल्दी बुलाकर लाओ। समय बर्बाद मत करो।”
एक और सेवक बीरबल को बुलाने गया। थोड़ी देर बाद बीरबल दरबार में आए। वे हमेशा की तरह मुस्कराते हुए अकबर के सामने झुके।
“आदाब अर्ज है, जहांपनाह। आपने बुलाया है?” बीरबल ने विनम्रता से कहा।
अकबर ने स्थिति समझाई। बीरबल ने कहा, “हुजूर, मैं अभी उस दूत से मिलता हूं।”
बीरबल दूत के पास गए। दूत ने उन्हें एक पत्र दिया और कहा, “यह पत्र बहुत महत्वपूर्ण है। इसे तुरंत बादशाह तक पहुंचाना है।”
बीरबल ने पत्र पढ़ा। उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखाई दीं। पत्र में लिखा था कि पड़ोसी राज्य पर शत्रुओं का आक्रमण हो रहा है और उन्हें तुरंत सहायता चाहिए।
बीरबल तुरंत दरबार में वापस आए। उन्होंने अकबर से कहा, “जहांपनाह, यह बहुत गंभीर मामला है। हमारे मित्र राज्य को तत्काल सहायता की जरूरत है।”
अकबर ने पत्र पढ़ा और तुरंत कार्यवाही का आदेश दिया। उन्होंने कहा, “सेनापति को जल्दी बुलाकर लाओ। सेना को तैयार करने का आदेश दो।”
लेकिन तभी बीरबल ने कहा, “जहांपनाह, एक मिनट रुकिए। मुझे लगता है कि यहां कुछ गड़बड़ है।”
अकबर ने आश्चर्य से पूछा, “क्या मतलब, बीरबल?”
बीरबल ने समझाया, “हुजूर, अगर वाकई इतनी जल्दी थी, तो दूत सीधे आपसे मिलता। उसने मुझसे मिलने की जिद क्यों की? और देखिए, इस पत्र की लिखावट भी अजीब लग रही है।”
बीरबल ने पत्र को ध्यान से देखा और कहा, “जहांपनाह, यह पत्र नकली है। असली राजा इस तरह नहीं लिखते।”
अकबर ने तुरंत सिपाहियों को आदेश दिया कि दूत को पकड़ा जाए। जब दूत से पूछताछ की गई, तो वह सच उगल गया। वह दरअसल एक जासूस था जो अकबर की सेना को भटकाना चाहता था।
अकबर ने बीरबल की प्रशंसा करते हुए कहा, “बीरबल, तुमने बहुत अच्छा काम किया। तुम्हारी तत्परता और सूझबूझ ने हमें बड़े नुकसान से बचाया।”
बीरबल ने विनम्रता से कहा, “जहांपनाह, जल्दी करना अच्छी बात है, लेकिन बिना सोचे-समझे जल्दबाजी करना खतरनाक हो सकता है। समय की पाबंदी जरूरी है, लेकिन सही समय पर सही निर्णय लेना और भी जरूरी है।”
अकबर ने मुस्कराते हुए कहा, “तुम बिल्कुल सही कह रहे हो, बीरबल। आज तुमने हमें एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया है।”
उस दिन के बाद से अकबर के दरबार में एक नया नियम बना। जब भी कोई “जल्दी बुलाकर लाओ” कहता, तो सभी याद रखते कि तत्परता के साथ-साथ सोच-विचार भी जरूरी है।
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि समय की पाबंदी और तत्परता अच्छी बातें हैं, लेकिन बिना सोचे-समझे जल्दबाजी करना नुकसानदायक हो सकता है। हमें हमेशा सही समय पर सही निर्णय लेना चाहिए। बीरबल की तरह हमें भी धैर्य रखकर परिस्थिति को समझना चाहिए।
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