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कुत्ते की पूंछ और बीरबल की बुद्धि

मुगल सम्राट अकबर के दरबार में एक दिन बहुत ही रोचक घटना घटी। दरबार में सभी दरबारी अपनी-अपनी जगह बैठे हुए थे। अकबर बादशाह अपने सिंहासन पर विराजमान थे और बीरबल भी अपनी जगह पर मौजूद थे।

अचानक दरबार के बाहर से एक कुत्ते की आवाज सुनाई दी। कुत्ता भौंक रहा था और अपनी पूंछ हिला रहा था। यह देखकर अकबर के मन में एक विचित्र प्रश्न आया।

अकबर ने दरबार में उपस्थित सभी दरबारियों से पूछा, “क्या आप लोग बता सकते हैं कि कुत्ते की पूंछ को सीधा करना संभव है या नहीं?”

यह सुनकर सभी दरबारी सोच में पड़ गए। कुछ दरबारियों ने कहा, “हुजूर, यदि हम कुत्ते की पूंछ को बांस की नली में डालकर कई दिनों तक रखें तो शायद वह सीधी हो जाए।”

दूसरे दरबारी ने सुझाव दिया, “महाराज, यदि हम कुत्ते की पूंछ को लकड़ी के तख्ते से बांधकर रखें तो वह जरूर सीधी हो जाएगी।”

तीसरे दरबारी ने कहा, “बादशाह सलामत, हमें कुत्ते की पूंछ पर गर्म तेल लगाकर उसे सीधा करने की कोशिश करनी चाहिए।”

अकबर ने सभी दरबारियों के सुझाव सुने, लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए। फिर उन्होंने बीरबल की तरफ देखा और पूछा, “बीरबल, तुम्हारा क्या विचार है? क्या कुत्ते की पूंछ को सीधा किया जा सकता है?”

बीरबल मुस्कराए और बोले, “जहांपनाह, मैं आपको एक छोटी सी कहानी सुनाता हूं।”

“एक बार एक किसान था। उसके पास एक कुत्ता था जिसकी पूंछ बहुत टेढ़ी थी। किसान को यह बात अच्छी नहीं लगती थी। उसने सोचा कि वह अपने कुत्ते की पूंछ को सीधा कर देगा।”

“किसान ने कुत्ते की पूंछ को एक मोटी बांस की नली में डाला और कसकर बांध दिया। वह रोज सुबह-शाम देखता था कि कहीं पूंछ सीधी हो गई हो।”

“छह महीने बाद जब किसान ने बांस की नली खोली तो देखा कि कुत्ते की पूंछ वैसी की वैसी टेढ़ी ही थी। बल्कि अब तो कुत्ता बीमार भी हो गया था।”

यह कहानी सुनाने के बाद बीरबल ने कहा, “महाराज, प्रकृति ने जिस चीज को जैसा बनाया है, वह वैसी ही रहती है। कुत्ते की पूंछ का टेढ़ा होना उसकी प्राकृतिक बनावट है।”

“यदि हम जबरदस्ती उसे बदलने की कोशिश करेंगे तो न केवल हमारा समय और मेहनत बर्बाद होगी, बल्कि उस जीव को भी कष्ट होगा।”

अकबर बीरबल की बात सुनकर बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, “बीरबल, तुमने बिल्कुल सही कहा है। हमें प्रकृति के नियमों का सम्मान करना चाहिए।”

फिर अकबर ने दरबार में उपस्थित सभी लोगों से कहा, “देखिए, यही तो बीरबल की खासियत है। वह हर समस्या का समाधान बुद्धिमानी से निकालता है।”

उस दिन के बाद से दरबार में जब भी कोई असंभव काम की बात करता था, तो लोग कहते थे, “यह तो कुत्ते की पूंछ सीधी करने जैसा काम है।”

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें प्रकृति के नियमों का सम्मान करना चाहिए। जो चीजें प्राकृतिक रूप से बनी हैं, उन्हें जबरदस्ती बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। धैर्य और समझदारी से हर समस्या का समाधान मिल जाता है।

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