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जो बुरा करेगा उसका बुरा होगा – अकबर बीरबल की कहानी

बादशाह अकबर के दरबार में एक दिन एक धनी सेठ आया। उसका नाम था सेठ कमलचंद। वह बहुत अमीर था लेकिन अपने मन में गरीबों के लिए कोई दया नहीं रखता था। वह हमेशा अपने नौकरों और मजदूरों के साथ बुरा व्यवहार करता था।

सेठ कमलचंद ने बादशाह अकबर से कहा, “हुजूर, मैं आपके राज्य में सबसे बड़ा व्यापारी हूं। मैं चाहता हूं कि आप मुझे राज्य का मुख्य व्यापारी बना दें।”

बादशाह अकबर ने बीरबल की तरफ देखा। बीरबल समझ गया कि यह सेठ कुछ अलग है। उन्होंने सेठ से पूछा, “सेठ जी, आप अपने कारोबार में अपने कर्मचारियों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं?”

सेठ कमलचंद घमंड से बोला, “मैं उन्हें कम पैसे देता हूं और ज्यादा काम करवाता हूं। जो बुरा करेगा उसका बुरा होगा – यह तो प्राकृतिक नियम है, लेकिन मैं तो सिर्फ अपना फायदा देखता हूं।”

बीरबल मुस्कराए और बोले, “सेठ जी, आपकी बात सही है। जो बुरा करेगा उसका बुरा होगा। लेकिन क्या आप एक छोटी सी परीक्षा दे सकते हैं?”

सेठ ने अहंकार से कहा, “हां हां, क्यों नहीं! मैं कोई भी परीक्षा दे सकता हूं।”

बीरबल ने कहा, “आप कल सुबह अपने घर के सामने एक गरीब आदमी को देखेंगे। उसकी मदद करना और फिर यहां आना।”

अगले दिन सेठ कमलचंद अपने घर से निकला तो उसने देखा कि एक बूढ़ा आदमी सड़क पर गिरा हुआ है। वह बहुत परेशान लग रहा था। लेकिन सेठ ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया और आगे बढ़ गया।

दरबार में पहुंचकर सेठ ने झूठ बोला, “हुजूर, मैंने एक गरीब की बहुत मदद की है।”

बीरबल मुस्कराए और बोले, “सेठ जी, वह बूढ़ा आदमी कोई और नहीं, मेरा भेजा हुआ आदमी था। आपने उसकी मदद नहीं की बल्कि उसे अनदेखा किया।”

सेठ का चेहरा लाल हो गया। वह बोला, “यह तो धोखा है!”

बीरबल ने शांति से कहा, “सेठ जी, आपने कहा था कि जो बुरा करेगा उसका बुरा होगा। आपने एक जरूरतमंद की मदद नहीं की और झूठ भी बोला। अब देखिए क्या होता है।”

अचानक एक सिपाही दरबार में आया और बोला, “हुजूर, सेठ कमलचंद के कारखाने में आग लग गई है। उसके मजदूरों ने बताया कि सेठ उनके साथ बुरा व्यवहार करता था, इसलिए किसी ने आग बुझाने में मदद नहीं की।”

सेठ कमलचंद घबरा गया। उसे समझ आ गया कि जो बुरा करेगा उसका बुरा होगा – यह बात सच में उसके साथ हो रही है।

बादशाह अकबर ने कहा, “सेठ जी, आपको अपने व्यवहार के परिणाम मिल गए हैं।”

सेठ कमलचंद ने बीरबल के पैर पकड़े और बोला, “बीरबल जी, मुझे माफ कर दीजिए। मैं समझ गया हूं कि जो बुरा करेगा उसका बुरा होगा। अब मैं सभी के साथ अच्छा व्यवहार करूंगा।”

बीरबल ने उसे उठाया और कहा, “सेठ जी, अभी भी समय है। जाइए और अपने मजदूरों की मदद करिए। उनके साथ अच्छा व्यवहार करिए। जो अच्छा करेगा उसका अच्छा होगा।”

सेठ कमलचंद तुरंत अपने कारखाने गया। उसने अपने सभी मजदूरों से माफी मांगी और उनकी आग बुझाने में मदद की। उसने सभी को उचित वेतन देने का वादा किया।

कुछ दिनों बाद सेठ का कारोबार पहले से भी बेहतर हो गया। उसके मजदूर खुश थे और मेहनत से काम करते थे।

सेठ कमलचंद फिर से दरबार आया और बोला, “बीरबल जी, आपने मुझे जीवन का सबसे बड़ा पाठ सिखाया है। सच में जो बुरा करेगा उसका बुरा होगा और जो अच्छा करेगा उसका अच्छा होगा।”

बादशाह अकबर ने प्रसन्न होकर कहा, “बीरबल, तुमने एक बार फिर साबित कर दिया कि सच्चाई और अच्छाई की हमेशा जीत होती है।”

सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमारे कर्मों का फल हमें जरूर मिलता है। जो बुरा करेगा उसका बुरा होगा और जो अच्छा करेगा उसका अच्छा होगा। इसलिए हमें हमेशा दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। व्यापारी का उदय और पतन इस विषय पर और जानकारी के लिए पढ़ें।

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