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सियार और हाथी का मृत शरीर

बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल में चतुर नाम का एक सियार रहता था। वह अपनी चालाकी और बुद्धिमानी के लिए पूरे जंगल में प्रसिद्ध था। एक दिन जंगल में घूमते समय उसे एक विशाल हाथी का मृत शरीर दिखाई दिया।

चतुर सियार खुशी से नाचने लगा। उसने सोचा, “वाह! कितना बड़ा भोजन मिला है। इससे मैं कई महीनों तक अपना पेट भर सकूंगा।” लेकिन जब उसने हाथी का मृत शरीर देखा तो एक समस्या आई – हाथी की मोटी खाल को फाड़ना उसके लिए असंभव था।

तभी वहाँ एक शेर आया। शेर ने हाथी का मृत शरीर देखकर कहा, “अरे सियार! यह तो बहुत बड़ा शिकार है। मैं इसे खाऊंगा।”

चतुर सियार ने तुरंत अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया। उसने कहा, “महाराज, यह हाथी जहरीला है। इसे खाना खतरनाक है। मैं तो इसकी रक्षा कर रहा था कि कोई गलती से इसे न खा ले।”

शेर डर गया और वहाँ से चला गया। अब सियार की दूसरी समस्या थी – हाथी का मृत शरीर इतना कठोर था कि वह उसे फाड़ नहीं सकता था।

कुछ देर बाद एक चील आई। सियार ने चील से कहा, “मित्र चील, तुम्हारी चोंच बहुत तेज है। क्या तुम इस हाथी की खाल में छेद कर सकती हो? बदले में मैं तुम्हें इसका स्वादिष्ट मांस दूंगा।”

चील ने खुशी से हामी भरी और अपनी तेज चोंच से हाथी के मृत शरीर में छेद कर दिया। अब सियार आसानी से मांस खा सकता था।

कुछ दिन बाद एक भेड़िया आया। उसने हाथी का मृत शरीर देखकर कहा, “सियार, यह तो बहुत बड़ा भोजन है। मुझे भी कुछ हिस्सा दे दो।”

सियार ने कहा, “भाई भेड़िया, मैं तो इसकी रक्षा कर रहा हूँ। यह राजा शेर का भोजन है। अगर तुमने इसे छुआ तो शेर तुम्हें मार देगा।”

भेड़िया डरकर भाग गया। इस तरह चतुर सियार ने अपनी बुद्धि से सभी को भगा दिया और अकेले ही हाथी के मृत शरीर का आनंद लेता रहा।

लेकिन एक दिन एक बूढ़ा बाघ आया। वह बहुत कमजोर था और शिकार नहीं कर सकता था। उसने सियार से कहा, “बेटा, मैं बहुत भूखा हूँ। कृपया मुझे भी कुछ खाने को दे दो।”

सियार ने देखा कि बाघ वास्तव में बहुत कमजोर और भूखा है। उसका दिल पिघल गया। उसने सोचा कि अब तक उसने हाथी के मृत शरीर का काफी हिस्सा खा लिया है।

सियार ने कहा, “दादाजी, आइए। मैं आपको खाना देता हूँ।” उसने बूढ़े बाघ को हाथी के मृत शरीर का एक अच्छा हिस्सा दिया।

बाघ ने खुश होकर कहा, “बेटा, तुमने मेरी जान बचाई है। भगवान तुम्हारा भला करे।”

उस दिन के बाद से सियार को एहसास हुआ कि बुद्धि का सही उपयोग दूसरों की मदद करने में है, न कि केवल अपने फायदे के लिए।

शिक्षा: बुद्धि और चालाकी का उपयोग केवल अपने फायदे के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की मदद के लिए भी करना चाहिए। सच्ची बुद्धिमानी दया और करुणा के साथ आती है।

इस कहानी में सियार की चालाकी और बुद्धिमानी का उपयोग देखने के लिए आप सियार और लड़ते बकरों की कहानी पढ़ सकते हैं। यदि आप और भी शिक्षाप्रद कहानियाँ पढ़ना चाहते हैं, तो समझदार बंदर की कहानी देखें।

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