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किसकी नेमत – बीरबल की बुद्धिमानी की कहानी

मुगल सम्राट अकबर के दरबार में एक दिन बहुत ही रोचक घटना घटी। बादशाह अकबर अपने महल की छत पर टहल रहे थे जब उन्होंने देखा कि एक गरीब किसान अपने बैलों के साथ खेत में काम कर रहा है। किसान बहुत मेहनत से अपनी फसल की देखभाल कर रहा था।

अकबर ने सोचा, “यह किसान इतनी मेहनत कर रहा है, लेकिन किसकी नेमत से उसे अच्छी फसल मिलेगी?” इस प्रश्न ने बादशाह के मन में जिज्ञासा जगाई।

अगले दिन दरबार में अकबर ने अपने सभी दरबारियों से पूछा, “बताइए, एक किसान की मेहनत का फल किसकी नेमत है? क्या यह उसकी अपनी मेहनत का परिणाम है या फिर ईश्वर की कृपा का?”

दरबारियों में से कुछ ने कहा, “हुजूर, यह किसान की मेहनत का फल है।” कुछ अन्य ने कहा, “नहीं महाराज, यह तो ईश्वर की कृपा है।” लेकिन बीरबल चुप रहे।

अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल, तुम क्या कहते हो? किसकी नेमत है यह सब?”

बीरबल ने विनम्रता से कहा, “जहांपनाह, इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए मुझे कुछ दिन का समय चाहिए। मैं एक प्रयोग करना चाहता हूं।”

अकबर ने अनुमति दे दी। बीरबल ने तुरंत एक योजना बनाई। उन्होंने महल के बगीचे में एक छोटा सा खेत तैयार करवाया और वहां सबसे अच्छे बीज बोए। फिर उन्होंने उस खेत के चारों ओर ऊंची दीवार बनवा दी।

कुछ दिन बाद जब पौधे अंकुरित हुए, तो बीरबल ने उस खेत को पूरी तरह से ढक दिया ताकि सूर्य की रोशनी अंदर न जा सके। साथ ही उन्होंने पानी देना भी बंद कर दिया।

एक सप्ताह बाद बीरबल ने अकबर को वह खेत दिखाया। अकबर ने देखा कि सभी पौधे मुरझा गए थे और सूख गए थे।

बीरबल ने कहा, “हुजूर, मैंने सबसे अच्छे बीज बोए थे, सबसे अच्छी मिट्टी का इस्तेमाल किया था, लेकिन फिर भी पौधे मर गए। क्यों?”

अकबर ने कहा, “क्योंकि तुमने उन्हें धूप और पानी नहीं दिया।”

बीरबल ने मुस्कराते हुए कहा, “बिल्कुल सही कहा आपने। अब दूसरा खेत देखिए।” उन्होंने दूसरा खेत दिखाया जहां वे रोज पानी देते थे और धूप भी आती थी, लेकिन वहां कोई मेहनत नहीं की गई थी। वहां खरपतवार ही खरपतवार उगे थे।

“यहां ईश्वर की सभी नेमतें थीं – सूर्य की रोशनी, हवा, पानी, लेकिन मेहनत नहीं थी। इसलिए अच्छी फसल नहीं हुई।” बीरबल ने समझाया।

फिर बीरबल ने तीसरा खेत दिखाया जहां अच्छे बीज बोए गए थे, नियमित पानी दिया गया था, धूप आती थी, और साथ ही अच्छी देखभाल भी की गई थी। वहां सुंदर हरे-भरे पौधे लहलहा रहे थे।

बीरबल ने कहा, “महाराज, अब आप समझ गए होंगे कि किसकी नेमत है यह सब। यह न केवल इंसान की मेहनत का फल है और न ही केवल ईश्वर की कृपा का। यह दोनों का मिला-जुला परिणाम है।”

“ईश्वर ने हमें सूर्य, चांद, हवा, पानी, मिट्टी दी है। यह उसकी नेमत है। लेकिन इन सबका सदुपयोग करना, मेहनत करना, यह इंसान का काम है। जब दोनों मिल जाते हैं, तभी सफलता मिलती है।”

अकबर बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, “वाह बीरबल! तुमने बहुत ही सुंदर तरीके से समझाया है। सच में, किसकी नेमत का यही सही उत्तर है।”

उस दिन के बाद से अकबर हमेशा याद रखते थे कि जीवन में सफलता पाने के लिए ईश्वर की कृपा के साथ-साथ अपनी मेहनत भी जरूरी है। बीरबल की इस बुद्धिमानी की चर्चा पूरे राज्य में फैल गई।

सीख: जीवन में सफलता पाने के लिए केवल भाग्य या केवल मेहनत काफी नहीं है। ईश्वर की कृपा और अपनी मेहनत दोनों का संयोग ही सच्ची सफलता दिलाता है। हमें ईश्वर का आभारी होना चाहिए और साथ ही अपनी जिम्मेदारियों को भी पूरा करना चाहिए।

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