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किसका अफसर – बीरबल की बुद्धिमानी
मुगल सम्राट अकबर के दरबार में एक दिन बड़ी चहल-पहल थी। दरबार में कई नए अधिकारी नियुक्त हुए थे और सभी अपने-अपने पद की शान में मगन थे। अकबर बादशाह अपने सिंहासन पर बैठे हुए दरबारियों की बातें सुन रहे थे।
तभी दरबार में एक नया अधिकारी आया। उसका नाम था मीर हसन। वह बहुत घमंडी था और अपने पद का बहुत अहंकार करता था। वह दरबार में आते ही जोर से बोला, “मैं इस प्रांत का सबसे बड़ा अफसर हूं! सभी को मेरी आज्ञा माननी होगी!”
यह सुनकर अकबर बादशाह को थोड़ी परेशानी हुई। उन्होंने देखा कि यह अधिकारी अधिकार और जिम्मेदारी के बीच का अंतर नहीं समझ रहा था। अकबर ने बीरबल की तरफ देखा और आंखों ही आंखों में इशारा किया।
बीरबल समझ गए कि बादशाह क्या चाहते हैं। वे मुस्कराते हुए खड़े हुए और बोले, “हुजूर, मैं एक कहानी सुनाना चाहता हूं।”
“हां बीरबल, सुनाओ,” अकबर ने कहा।
बीरबल ने कहानी शुरू की: “एक बार एक गांव में दो व्यक्ति रहते थे। एक था राजू और दूसरा था श्याम। राजू को गांव का मुखिया बनाया गया था। वह हमेशा कहता था कि वह सबसे बड़ा अफसर है और सभी को उसकी बात माननी चाहिए।”
“दूसरी तरफ श्याम एक साधारण किसान था, लेकिन वह हमेशा दूसरों की मदद करता था। जब भी कोई मुसीबत आती, श्याम सबसे पहले आगे आता था।”
मीर हसन ध्यान से सुन रहा था। बीरबल ने आगे कहा: “एक दिन गांव में बाढ़ आ गई। राजू अपने घर में छुप गया और कहने लगा कि यह उसकी जिम्मेदारी नहीं है। लेकिन श्याम ने अपनी जान की परवाह न करते हुए सभी लोगों को बचाया।”
“गांव वालों ने देखा कि असली अफसर कौन है। जो सिर्फ अधिकार चाहता है या जो जिम्मेदारी उठाता है।”
कहानी सुनकर मीर हसन को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह समझ गया कि किसका अफसर होना सिर्फ पद पाने से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने से तय होता है।
अकबर बादशाह ने बीरबल की तरफ देखकर मुस्कराते हुए कहा, “बीरबल, तुमने बहुत अच्छी बात कही है। अधिकार और जिम्मेदारी के बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है।”
मीर हसन ने झुककर कहा, “हुजूर, मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया है। मैं समझ गया हूं कि सच्चा अफसर वह होता है जो अपनी जिम्मेदारी को समझता है, न कि सिर्फ अधिकार का इस्तेमाल करता है।”
बीरबल ने कहा, “मीर हसन, याद रखिए कि अधिकार एक उपहार है जो जिम्मेदारी के साथ आता है। जो व्यक्ति इस बात को समझता है, वही सच्चा अफसर बनता है।”
उस दिन के बाद मीर हसन एक बदला हुआ इंसान बन गया। वह अपने अधिकार का सदुपयोग करने लगा और हमेशा अपनी जिम्मेदारी को पहले रखता था। दरबार के सभी लोग उसका सम्मान करने लगे।
अकबर बादशाह ने बीरबल से कहा, “बीरबल, तुमने आज फिर से साबित कर दिया कि बुद्धि से हर समस्या का समाधान हो सकता है।”
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चा अधिकारी वह होता है जो अपनी जिम्मेदारी को समझता है। अधिकार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना ही सच्ची नेतृत्व की पहचान है। जो व्यक्ति सिर्फ अधिकार चाहता है लेकिन जिम्मेदारी से भागता है, वह कभी भी सच्चा अफसर नहीं बन सकता।













